एक शहर अनजाना सा....

मेरी मंजिल का मुझे गुमान नहीं है,
पर शायद है वो एक शहर यादों का,
जिसकी गलियों में खुशी बहती हैं,
मुस्कुराहटों से हर सुबह होती है,
प्यार की छाँव हर शख्स पर दिखती है,
कभी कभी गम भी नुमायाँ होता है,
पर सिर्फ साये में गिरती दीवारों के,
ना जाने है कहाँ ये शहर,कहाँ हैं ये गलियाँ,
शायद है यह बस एक ख़याल,
जो आता रहता है हरदम बस यूँ ही....


AnSh :)

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