Dedicated to friends
I don't remember who wrote this poem
But I m sure it's not mine atleast
I found it written in my notebook
Read on
दोस्तों याद तुम्हारी बहुत आती है,
यादें तुम्हारी या उन लम्हों की,
जो बिताये थे साथ बचपन में .
आज भी ताजा हैं वे याद इस पल में ,
दोस्तों याद तुम्हारी बहुत आती है,
स्कूल से गोल मार अमरूद के बगीचे में,
दौड्ते दौड्ते अमरूद तोडते,
माली का डर मन में भरा हुआ ,
पेड से गिरने के डर से डरा
But I m sure it's not mine atleast
I found it written in my notebook
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दोस्तों याद तुम्हारी बहुत आती है,
यादें तुम्हारी या उन लम्हों की,
जो बिताये थे साथ बचपन में .
आज भी ताजा हैं वे याद इस पल में ,
दोस्तों याद तुम्हारी बहुत आती है,
स्कूल से गोल मार अमरूद के बगीचे में,
दौड्ते दौड्ते अमरूद तोडते,
माली का डर मन में भरा हुआ ,
पेड से गिरने के डर से डरा
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