Night(रिश्ता रात से )
रात का मुझसे कोई रिश्ता है,
जो हर रोज मुझे समझाने आती है,
बातें नहीं होती हमारी कभी,
पर एक दिलासा मुझसे दे जाती है,
पलकें हों बंद अगर,
तो हौले से कुछ कह जाती है,
जैसे कोई मरहम दे जाती है,
बोझ खयालों का मेरे,
चुप रहकर ये रात सहती है
बंद आँखों के दरीचों से भी,
देख लेता हूँ तेरे आने को,
चल देता हूँ साथ तेरे,
सारे गम भुलाने को,
ना कहते हुए कुछ भी,
बातें सारी हो जाती हैं,
समय की रेत पर भी,
कुछ
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