Kitaabon wala pyar (किताबों वाला प्यार)
धूप सिमटी थी बाहों में मेरे,
और मैं था उसके आगोश में,
ख़्वाबों के बादल थे आसमान पर,
और प्यार की गर्माहट ज़मीन पर,
धूप फर्श पर सरकती जा रही थी,
यादों की पुरवाई संग ला रही थी,
सारा समां यूँ तो बेहद रंगीन था,
पर जाने क्यूँ मैं यूँ ग़मगीन था,
शायद मुश्किल है यकीन करना,
की ख़्वाबों की बातें हैं बस ख़्वाबों में,
जिसे समझता था प्यार अब तक,
वो बस एक किस्सा हैं किताबों में...
AnSh :)
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